अनुमंडल और प्रखंड

  • अनुमण्डल की संख्या :- 1
  • अनुमण्डल का नाम :- सिमडेगा
  • अंचलों की संख्या :- 10
  • प्रखण्डो की संख्या :- 10
  • पंचायतों की संख्या :- 94
  • गावों की संख्या :- 451
  • पंचायत समिति प्रमुख की संख्या :- 10
  • मुखिया की संख्या :- 94
  • शहरी स्थानीय निकायों की संख्या :- 1

अनुमण्डल अधिकारी (नागरिक)/अनुमण्डल दंडाधिकारी:

अनुमण्डल अधिकारी (नागरिक) अपने अनुमण्डल में एक प्रकार से एक उपायुक्त है। वास्तव में, अपने अधिकार क्षेत्र में अनेक राजस्व मामलों में उनके पास एक कलेक्टर के सामान शक्तियां निहित होती हैं| वे अनुमण्डल के कलेक्टर के रूप में अपील सुनते है। वे या तो भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक कनिष्ठ सदस्य या राज्य सिविल सेवा के एक वरिष्ठ सदस्य होते हैं, जिन्होंने अधीनस्थ पदों पर रहते हुए व्यापक अनुभव अर्जित किया होता है| वे अंचल अधिकारियों एवं अनुमण्डल में कार्यरत कर्मियों के नियन्त्रि पदाधिकारी होते हैं| अनुमण्डल अधिकारी उपायुक्त और सम्बंधित अनुमण्डल में पदस्थापित अंचल अधिकारियों के बीच पत्राचार का सामान्य माध्यम हैं|
अपने अधिकार क्षेत्र में अनुमण्डल अधिकारी के पास राजस्व, मजिस्ट्रेट, कार्यकारी पदाधिकारी और विकास के मामलों से संबंधित शक्तियां और दायित्व उसी प्रकार की होती हैं जैसी उपायुक्त के पास होती हैं| राजस्व से सम्बंधित कर्तव्यों में पर्यवेक्षण, निरिक्षण और भू-राजस्व का संग्रहण करना सम्मिलित हैं| अनुमण्डल में पदस्थापित सभी अधिकारियों, विशेष रूप से अनुमण्डल के अंतर्गत राजस्व, कृषि, पशुपालन और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के काम का समन्वय; दंडाधिकारी के रूप में- अनुमण्डल में पुलिस के साथ समन्वय; विभिन्न समुदायों और वर्गों के बीच बीच सौहार्द्र बनाए रखना; आपात स्थिति में विशेष सावधानियों बरतना और उचित कार्रवाई करना, विशेष रूप से पर्व त्योहारों में; और जिलाधिकारी को सिफारिश, जब वह खुद सक्षम नहीं है जैसे हथियारों के लाइसेंस देने के मामलों में। उनके पास अपने क्षेत्र में क़ानून व्यवस्था से सम्बंधित मामलों के लिए अपराध प्रक्रिया संहिता, झारखण्ड पुलिस रूल्स, और अन्य कानूनों के तहत पर्याप्त शक्तियां प्राप्त हैं|
एक दंडाधिकारी के रूप में वह एक पुलिस स्टेशन से, किसी भी रिकॉर्ड और रजिस्टर जो अपराध से निपटने के लिए मायने रखती है की मांग कर सकते हैं तथा मामले को समझने के लिए सम्बंधित पुलिस अधिकारी को बुला सकते हैं| एक खास अवधि के लिए किसी असामाजिक तत्व को बंधक बना सकते हैं| स्थानीय निकायों और बाजार समितियों के साथ आम लोगों के बीच और अधिक घनिष्ठ सहयोग स्थापित करते हैं|
वे ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनुमण्डल में प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने और विकास योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए उन्हें अन्य सरकारी अधिकारियों से सहयोग और मदद की आवश्यकता होती है| यद्यपि महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों पर, उन्हें उपायुक्त के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है| विधान सभा चुनाव में, उन्हें आम तौर पर “रिटर्निंग ऑफिसर” के रूप में नियुक्त किया जाता है।